व्यक्ति रहना सीखे मानव बन
संपूर्ण खिले संसार में जीवन
राजनीतिक भय पर हो बंधन
धर्म राजनीति का न हो बंधन ।
धर्म असीम व्यक्ति श्रृद्धा
कर्म ससीम जीवन संपदा
धर्म रास्ता अलौकिक सदा
कर्म माया मोहिनी संपदा ।
अनुभव कह खुद मनुष्य समझता हुआ
क्षुद्र बातों को लेकर लडने को पैदा हुआ
राजनीति से मत जोड मानव ईश्वर दुआ
धर्म हारता रहा जब वह आरूढ सत्ता हुआ ।।
छगनलाल गर्ग ।
संपूर्ण खिले संसार में जीवन
राजनीतिक भय पर हो बंधन
धर्म राजनीति का न हो बंधन ।
धर्म असीम व्यक्ति श्रृद्धा
कर्म ससीम जीवन संपदा
धर्म रास्ता अलौकिक सदा
कर्म माया मोहिनी संपदा ।
अनुभव कह खुद मनुष्य समझता हुआ
क्षुद्र बातों को लेकर लडने को पैदा हुआ
राजनीति से मत जोड मानव ईश्वर दुआ
धर्म हारता रहा जब वह आरूढ सत्ता हुआ ।।
छगनलाल गर्ग ।