बहुत सुन चुके
यह जरूरतो का सिलसिला
कब रूकता
नहीं सुना हमने
अधिक भार बढता तुलना से
तुम नहीं थक सकते
हृदय से कभी
कि कुछ पाया भी जीवन मे
हर संघर्ष मे
पाया अनपाया महसूस होता
जब देखते ओरो की ओरो की तरफ
यह विडंबना केवल मेरी नहीं
हर व्यक्ति की आशा से जुड़ी
अधिक की पिपाशा
नहीं लेने देती
पाये का सुख
अधिक द्रवित हुआ जाता
मेरी अपनी ही दशा से
कि देखो पाया भी नहीं रहा मेरा
आज
मैं हारा हुआ नितांत असफल
जिन्दगी
दौडता रहा जिंदगी भर
कि भर जाऊं पूरा
अपार दौलत
कुछ हुआ पर पूरा कहां
मैं असफल हूँ जिन्दगी तुझसे
अब नहीं चाहता जीना
अब मेरे दिल
छोड़ो ना यह अतृप्त जीवन
निस्सार हैं यह दुनिया
नहीं कोई सार्थक संग्रह
राममय होने ही चित मेरे
चले वापस ।
छगन लाल गर्ग।
यह जरूरतो का सिलसिला
कब रूकता
नहीं सुना हमने
अधिक भार बढता तुलना से
तुम नहीं थक सकते
हृदय से कभी
कि कुछ पाया भी जीवन मे
हर संघर्ष मे
पाया अनपाया महसूस होता
जब देखते ओरो की ओरो की तरफ
यह विडंबना केवल मेरी नहीं
हर व्यक्ति की आशा से जुड़ी
अधिक की पिपाशा
नहीं लेने देती
पाये का सुख
अधिक द्रवित हुआ जाता
मेरी अपनी ही दशा से
कि देखो पाया भी नहीं रहा मेरा
आज
मैं हारा हुआ नितांत असफल
जिन्दगी
दौडता रहा जिंदगी भर
कि भर जाऊं पूरा
अपार दौलत
कुछ हुआ पर पूरा कहां
मैं असफल हूँ जिन्दगी तुझसे
अब नहीं चाहता जीना
अब मेरे दिल
छोड़ो ना यह अतृप्त जीवन
निस्सार हैं यह दुनिया
नहीं कोई सार्थक संग्रह
राममय होने ही चित मेरे
चले वापस ।
छगन लाल गर्ग।