बड़ा आनन्दवर्धक सुविधा से प्राप्त
हर परिणाम बिना मेहनत से पाया
अच्छा भी लगता आनन्द भी देता
नहीं करता मन फिर
परिणाम की परवाह
सोचता रहता स्वयं करने से अच्छा
आजकल हर जगह
हर प्रकार की सुविधाओ के बड़े बड़े
लगे रहते हैं पोस्टर
करने को तत्पर हमारे लिए
सुविधाओं का इन्तजाम
फिर जो चाहे जिस क्षेत्र मे
अपना आकार अपना वर्चस्व बढाना
थोड़ी सी तिकडम से
थोड़ी मिली बाजारू ताम झाम की सुविधा से
क्यों ना हम फहराये
अपना परशम
ओर यही बस यही
चल रहा काव्य मे भी
शब्दों के साथ भावों की जगह
पिरोते हैं किमती हीरो से जज्बाती शब्द
जबकि अहमियत उनकी न अंकुरण मे देखी
न आज की कविता के शब्द श्रृंगार मे
केवल शब्द नहीं दे पाते भाव
कितने ही किमती क्यों ना हो
जब तक कि
उदगम ना हुआ हो हृदय से
बाजार के शब्द करते हैं आकर्षित
पर भीतर भाव को
स्पंदन देकर नहीं देते संवेदना
यही कारण की सुविधा का रस
नहीं भाता
केवल चमक ही देता आत्मसुख नहीं ।
छगन लाल गर्ग।
हर परिणाम बिना मेहनत से पाया
अच्छा भी लगता आनन्द भी देता
नहीं करता मन फिर
परिणाम की परवाह
सोचता रहता स्वयं करने से अच्छा
आजकल हर जगह
हर प्रकार की सुविधाओ के बड़े बड़े
लगे रहते हैं पोस्टर
करने को तत्पर हमारे लिए
सुविधाओं का इन्तजाम
फिर जो चाहे जिस क्षेत्र मे
अपना आकार अपना वर्चस्व बढाना
थोड़ी सी तिकडम से
थोड़ी मिली बाजारू ताम झाम की सुविधा से
क्यों ना हम फहराये
अपना परशम
ओर यही बस यही
चल रहा काव्य मे भी
शब्दों के साथ भावों की जगह
पिरोते हैं किमती हीरो से जज्बाती शब्द
जबकि अहमियत उनकी न अंकुरण मे देखी
न आज की कविता के शब्द श्रृंगार मे
केवल शब्द नहीं दे पाते भाव
कितने ही किमती क्यों ना हो
जब तक कि
उदगम ना हुआ हो हृदय से
बाजार के शब्द करते हैं आकर्षित
पर भीतर भाव को
स्पंदन देकर नहीं देते संवेदना
यही कारण की सुविधा का रस
नहीं भाता
केवल चमक ही देता आत्मसुख नहीं ।
छगन लाल गर्ग।