उफान आवेग
बेबूझ हुआ
ऊर्जा लिए मिलना चाहता
स्वयं की मोह भरी लालसा
आपूर्ति निमित्त
यह ताप भरी
आनंद की ऊर्मी
लोभ ओर मोह घीरी
कहता इसे
प्रेम की सघनता
देता जाता शात्विक स्नेह का
पावन स्फूरण
उतारू हूँ
तन की तृप्ति निमित्त
सभी उपाय
करने को संकल्पित
आज का युवा
नही मिलती
भावनाओं की भीड़
जहाँ कहती हो
कि प्रेम होता दान
अहंकार की
तृप्ति नहीं
एक तडप प्राणों की
जिसमें अंश छिपा
परमात्मा का
अनंत प्रेम की यह व्याख्या
कब लेगी मूर्त आकार
कि फिर कहें
नहीं हैं प्रेम
रूग्ण ऊर्मी ।
छगन लाल गर्ग।
बेबूझ हुआ
ऊर्जा लिए मिलना चाहता
स्वयं की मोह भरी लालसा
आपूर्ति निमित्त
यह ताप भरी
आनंद की ऊर्मी
लोभ ओर मोह घीरी
कहता इसे
प्रेम की सघनता
देता जाता शात्विक स्नेह का
पावन स्फूरण
उतारू हूँ
तन की तृप्ति निमित्त
सभी उपाय
करने को संकल्पित
आज का युवा
नही मिलती
भावनाओं की भीड़
जहाँ कहती हो
कि प्रेम होता दान
अहंकार की
तृप्ति नहीं
एक तडप प्राणों की
जिसमें अंश छिपा
परमात्मा का
अनंत प्रेम की यह व्याख्या
कब लेगी मूर्त आकार
कि फिर कहें
नहीं हैं प्रेम
रूग्ण ऊर्मी ।
छगन लाल गर्ग।