Friday, January 22, 2016

अतिक्रमण।

अकेला नहीं
जहां खडा हूँ
अस्तित्व लिपटा
अंधकार
चलने नहीं देता
प्रकाश की ओर
घेरे हैं मुझे
जीवन व्याप्त घाटी का
गहन अंधेरा
दो  हैं हम
विपरीत प्रवृति लिए
नहीं चाहता संघर्ष
विजेता बनू
सामर्थ्य की सीमा
अवबोध पाता
लडना होगी मूर्खता
अंधकार से
ठहराव होगा
अंधेरे से जीवन का
नहीं
करना होगा अतिक्रमण
नहीं रह सकता
घाटी लडते अंधकार से
जीवन भर
शिखर की रोशनी
देती आमंत्रण
रूकना
लडना अंधकार
जीवन खोना हैं
करना होगाअतिक्रमण
अंधेरे का
बढना होगा शिखर की ओर।
छगन लाल गर्ग।