Saturday, January 16, 2016

शब्द सत्य।

अभिव्यक्ति सत्य
शब्द देते नहीं थके
अबाध चल रहा
सिलसिला उद्धरण लिए
कौशल का खजाना
इस युग नित्य बहता
साबित करते सत्य
प्रमाण दिये
शब्द के साथ मेल खाते
चित्रों से
कि पुख्ता रहे मेरा कहा
पर हर शब्द
खोता जाता अपनी अहमियत
हमारे कारण
नहीं रहा विश्वास
शब्द ओर हमारे बीच
दोगलेपन का आवरण लिए
देते जाते अभिव्यक्ति
शब्दों को अपनी गरज
तभी शब्द खोते जाते
अपनी पावन पृष्ठभूमि
अपनी गहराईयां
व्यक्ति का उथलापन
ले डूबा शब्द शास्वतता
अब शब्द नहीं
व्यक्ति दिखता शब्द कहते
कंठ से कहे शब्द
हृदय का भेद नहीं कहते
हृदय की गहराई बसे शब्द
कंठ तक नहीं आते
अजीब है जीवन
शब्दों से स्वार्थ साधना
बहुत हुआ
ओर शब्द मोहताज है
व्यक्ति के।
छगन लाल गर्ग।