तुम हो या कि तस्वीर
एक ही आभास होता
आत्मा मे
दोनों चमकते हो
ऑखो मे प्यार लिए
देखना चाहता तुम्हें जी भर
हर रूप परिवर्तन
होता जाता
ऑखो की रोशनी के साथ
ऑसूओ लेने दो मुझे
दम थोड़ा थमो तो तुम
देखता हूँ निखरापन
मेरे महबूब का
बाहर बाहर
जब बुलाता उन्हें भीतर
नहीं रहता रूप बिम्ब
हो जाता समर्पित हुआ
एकाकार
नहीं रह पाता स्वयं
घूल मिल हो जाते विलिन
मात्र महारस
अनुभूति रहती
रोको तो नीर नयन
देख लू मोहक तस्वीर ।
छगन लाल गर्ग।
एक ही आभास होता
आत्मा मे
दोनों चमकते हो
ऑखो मे प्यार लिए
देखना चाहता तुम्हें जी भर
हर रूप परिवर्तन
होता जाता
ऑखो की रोशनी के साथ
ऑसूओ लेने दो मुझे
दम थोड़ा थमो तो तुम
देखता हूँ निखरापन
मेरे महबूब का
बाहर बाहर
जब बुलाता उन्हें भीतर
नहीं रहता रूप बिम्ब
हो जाता समर्पित हुआ
एकाकार
नहीं रह पाता स्वयं
घूल मिल हो जाते विलिन
मात्र महारस
अनुभूति रहती
रोको तो नीर नयन
देख लू मोहक तस्वीर ।
छगन लाल गर्ग।