दोहरापन अनिवार्य
अगर श्वास चाहू लेना
यही सत्य अपना
बदलता रहूं स्वरूप
कला जीवन
नित्य बदलते भाव सम
चलता रहे हर कदम
नहीं आ सके बाधा
सत्य लिपटी संवेदना की
पराजित करती जिंदगी
हाँ कला अभिनय चाहता
बनावट की सच्चाई
न छूटे
तरक्की करता सार्थक सूत्र
यहीं सार देता
यथार्थ जीना
संवेदनशील जीवन
नहीं भरता सुख देह तृप्ति
मन मत मांगों
विवशता।
छगन लाल गर्ग।
अगर श्वास चाहू लेना
यही सत्य अपना
बदलता रहूं स्वरूप
कला जीवन
नित्य बदलते भाव सम
चलता रहे हर कदम
नहीं आ सके बाधा
सत्य लिपटी संवेदना की
पराजित करती जिंदगी
हाँ कला अभिनय चाहता
बनावट की सच्चाई
न छूटे
तरक्की करता सार्थक सूत्र
यहीं सार देता
यथार्थ जीना
संवेदनशील जीवन
नहीं भरता सुख देह तृप्ति
मन मत मांगों
विवशता।
छगन लाल गर्ग।