तोड देता मुझे
ख्यालो का दरिया
जोडता नहीं
अति कर जाता
ओर मैं
टूटता जाता खंड खंड होता
ख्याल तेरा
लडाता मुझसे
शायद प्यासा रहा
होते तेरे
नहीं बन पाया सेतु
दीवार बना
हम दोनों बीच
वासना की
तेरी मेरी छाया तले
हर ख्याल
बनता रहा विचारों का तनाव
कैसे कहूँ
प्रेम का दरिया
कदमों की ऊर्जा
प्राणों की प्यास
प्यार भरी
तरसता रहा मोह
नहीं सामर्थ्य इसका
पा सके प्रेम निर्मलता
अन्यथा
ख्याल तेरे
शक्ति बने पहुँच जाते
प्राणों तक
ओर विरह सघन बन
छा जाता मिलन बन
नहीं रहती मुझे
शब्दों की जरूरत
कि करू इजहार
स्मृति पल
रमते तुम चेतना मे
ओर मुग्ध हुआ
भूलता जाता
अस्तित्व मेरा
नहीं जीया प्रेम
मोह भ्रमित विसरता रहा
मोह भंवर बीच
वितृष्णा घीरा
लडता हूँ ख्यालो से।
छगन लाल गर्ग।
ख्यालो का दरिया
जोडता नहीं
अति कर जाता
ओर मैं
टूटता जाता खंड खंड होता
ख्याल तेरा
लडाता मुझसे
शायद प्यासा रहा
होते तेरे
नहीं बन पाया सेतु
दीवार बना
हम दोनों बीच
वासना की
तेरी मेरी छाया तले
हर ख्याल
बनता रहा विचारों का तनाव
कैसे कहूँ
प्रेम का दरिया
कदमों की ऊर्जा
प्राणों की प्यास
प्यार भरी
तरसता रहा मोह
नहीं सामर्थ्य इसका
पा सके प्रेम निर्मलता
अन्यथा
ख्याल तेरे
शक्ति बने पहुँच जाते
प्राणों तक
ओर विरह सघन बन
छा जाता मिलन बन
नहीं रहती मुझे
शब्दों की जरूरत
कि करू इजहार
स्मृति पल
रमते तुम चेतना मे
ओर मुग्ध हुआ
भूलता जाता
अस्तित्व मेरा
नहीं जीया प्रेम
मोह भ्रमित विसरता रहा
मोह भंवर बीच
वितृष्णा घीरा
लडता हूँ ख्यालो से।
छगन लाल गर्ग।