||दोहे||
अकड़ रहे हम अस्मिता, शून्य विवर संसार!
भ्रमित पवन सी जिंदगी, ले लो नेह अपार !!१
जाना कब है सोच मे , लगे नही अनुमान!
जीने का पल आज है,आगे का अभिमान!!२
देह रेत दीवार है, या फिर कुसुम कपोल!
मृत्यु बवंडर क्रूर है, लेत प्राण अनमोल!!३
रिश्तो के संसार मे, मोह भरा जंजाल!
नदी नीर के वेग सा ,छूटे साथ विशाल!!४
कच्चा तन आकार है, कागा छल अतिसार!
सत्य बड़प्पन छोड़ के, जीता मन अभिसार!!५
सतगुरु लौ है रश्मि की, परम ब्रह्म अवतार!
रैन राग अब त्याग दे , प्राण चहे करतार!!६
चमक दमक पल देह रे, धोखे मे संसार!
मोह मदन रस छोड़ दे , जाना है उस पार! ७
आँखो देखा सत्य है, भीतर किया विचार!
जो भी होता अन्य है, मै भी खड़ा कतार!!८
भज प्राणी चित राम को, केवल यही उपाय!
तज माया सच जान के, साधो शरण सुहाय !!९
सतगुरु मेरे दीप है, रोशन चित संसार !
दिव्य ज्योति मे लीन है,श्वासों का व्यापार!!१०
जाग मना अब भोर है, कर्म धर्म चहुँओर!
सतगुरु रज मे सार है, माया है चितचोर!!११
छगन लाल गर्ग "विज्ञ"!